ham dasht-e-be-karaan ki azaan ho ga.e to kya | हम दश्त-ए-बे-कराँ की अज़ाँ हो गए तो क्या

  - P P Srivastava Rind
हमदश्त-ए-बे-कराँकीअज़ाँहोगएतोक्या
वहशतमेंअबकीबारज़ियाँहोगएतोक्या
बासीघुटनसेघरकेअँधेरेकमहुए
हमरातजुगनुओंकीदुकाँहोगएतोक्या
उलझनबढ़ीतोचंदख़राबेख़रीदलाए
सौदेमेंअबकीबारज़ियाँहोगएतोक्या
घरमेंहमारेक़ैदरहाज़िंदगीकाशोर
हमबे-ज़बाननज़र-ए-फ़ुग़ाँहोगएतोक्या
हमहैंहमाराशहरहैपुख़्तामकानहै
कुछमक़बरेनसीब-ए-ख़िज़ाँहोगएतोक्या
सत-रंगआसमाँकीधनकहैतुम्हारेसाथ
हमदलदलीज़मीनयहाँहोगएतोक्या
जबधूपआसमानकेहुजरेमेंसोगई
आसेबतीरगीकेजवाँहोगएतोक्या
पतझड़नेजबसेमाँगसजाईहैअपनी'रिंद'
हमसूनीरहगुज़रकानिशाँहोगएतोक्या
  - P P Srivastava Rind
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