ufuq pe doodhiya saaya jo paanv dharne laga | उफ़ुक़ पे दूधिया साया जो पाँव धरने लगा

  - P P Srivastava Rind
उफ़ुक़पेदूधियासायाजोपाँवधरनेलगा
मुहीबरातकाशीराज़ाहीबिखरनेलगा
तमामउम्रजोलड़तारहामिरेअंदर
मिराज़मीरहीमुझसेफ़रारकरनेलगा
सफ़रमेंजबकभीला-सम्तियोंकाज़िक्रहुआ
हमाराक़ाफ़िलातूल-ए-सफ़रसेडरनेलगा
सुलगरहाहैकहींदूरदर्दकाजंगल
जोआसमानपेकड़वाधुआँबिखरनेलगा
चढ़ीनदीकोमैंपायाबकरकेक्याआया
तमामशहरहीदरियाकेपारकरनेलगा
अजीबकर्बसेगुज़राहैजुगनुओंकाजुलूस
कहाँठहरनाथाइसकोकहाँठहरनेलगा
हमारेसाथरहीहैसफ़रमेंबे-ख़बरी
जुनूँमेंसोचकाइम्कानकामकरनेलगा
बहुतअजीबहैबातिनकीगुमरही'रिंद'
सुकूत-ए-ज़ाहिरीटुकड़ोंमेंथाबिखरनेलगा
  - P P Srivastava Rind
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy