tum aa ga.e ho jab se khatkane lagii hai shaam | तुम आ गए हो जब से खटकने लगी है शाम

  - Owais Ahmad Dauran
तुमगएहोजबसेखटकनेलगीहैशाम
साग़रकीतरहरोज़छलकनेलगीहैशाम
शायदकिसीकीयादकामौसमफिरगया
पहलूमेंदिलकीतरहधड़कनेलगीहैशाम
कुछतूहीअपनेख़ून-ए-रमीदाकीलेख़बर
पलकोंपेक़तराक़तराटपकनेलगीहैशाम
सहरा-ए-पुर-सुकूतमेंकुछआहुओंकेसाथ
फिरकिसकीआरज़ूमेंभटकनेलगीहैशाम
क्याजानेआजक्यूँँकिसीमज़दूरकीतरह
सूरजग़ुरूबहोतेहीथकनेलगीहैशाम
कुछऔरआइनामेंसँवरनेलगेहैंवो
जिसदिनसेउनपेजानछिड़कनेलगीहैशाम
'दौराँ'सुनाहैसूरत-ए-गेसू-ए-अम्बरीं
इमसालफिरचमनमेंमहकनेलगीहैशाम
  - Owais Ahmad Dauran
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