ai bulbul-e-dil daud ke jaanaan koon pahunch tuun | ऐ बुलबुल-ए-दिल दौड़ के जानाँ कूँ पहुँच तूँ

  - Obaidullah Khan Mubtala
बुलबुल-ए-दिलदौड़केजानाँकूँपहुँचतूँ
वीराना-ए-तनछोड़गुलिस्ताँकूँपहुँचतूँ
तुझहिज्रसींहूँजाँ-ब-लबयारशिफ़ा-बख़्श
जल्दीसेमिरेदर्दकेदरमाँकूँपहुँचतूँ
याक़ूबतिरेग़मसतीयूसुफ़-ए-मिस्री
बेकलहैशिताबीसतीकनआँ'कूँपहुँचतूँ
लगनाहैतुझेपाँवसींगरदिल-ए-पुर-ख़ूँ
संजाफ़नमनशोख़केदामाँकूँपहुँचतूँ
दिलजोतुझेजगमनेहोनाहैसुरख़-रू
तूपिउकेलब-ए-ला'ल-ए-बदख़्शाँकूँपहुँचतूँ
हैहुस्नकीगरमीसेतीबेताबशब-ओ-रोज़
बाद-ए-सहरज़ुल्फ़-ए-परेशाँकूँपहुँचतूँ
  - Obaidullah Khan Mubtala
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy