sahib-e-mehr-o-wafa arz-o-sama kyun chup hai | साहिब-ए-मेहर-ओ-वफ़ा अर्ज़-ओ-समा क्यूँँ चुप है

  - Obaidullah Aleem
साहिब-ए-मेहर-ओ-वफ़ाअर्ज़-ओ-समाक्यूँँचुपहै
हमपेतोवक़्तकेपहरेहैंख़ुदाक्यूँँचुपहै
बे-सबबग़ममेंसुलगनामिरीआदतहीसही
साज़ख़ामोशहैक्यूँँशोला-नवाक्यूँँचुपहै
फूलतोसहमगएदस्त-ए-करमसेदम-ए-सुब्ह
गुनगुनातीहुईआवारासबाक्यूँँचुपहै
ख़त्महोगाकभीसिलसिला-ए-अहल-ए-वफ़ा
सोचदावर-ए-मक़्तलयेफ़ज़ाक्यूँँचुपहै
मुझपेतारीहैरह-ए-इश्क़कीआसूदाथकन
तुझपेक्यागुज़रीमिरेचाँदबताक्यूँँचुपहै
जाननेवालेतोसबजानगएहोंगे'अलीम'
एकमुद्दतसेतिराज़ेहन-ए-रसाक्यूँँचुपहै
  - Obaidullah Aleem
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