tu apni awaaz men gum hai main apni awaaz men chup | तू अपनी आवाज़ में गुम है मैं अपनी आवाज़ में चुप

  - Obaidullah Aleem
तूअपनीआवाज़मेंगुमहैमैंअपनीआवाज़मेंचुप
दोनोंबीचखड़ीहैदुनियाआईना-ए-अल्फ़ाज़मेंचुप
अव्वलअव्वलबोलरहेथेख़्वाब-भरीहैरानीमें
फिरहमदोनोंचलेगएपातालसेगहरेराज़मेंचुप
ख़्वाब-सरा-ए-ज़ातमेंज़िंदाएकतोसूरतऐसीहै
जैसेकोईदेवीबैठीहोहुजरा-ए-राज़-ओ-नियाज़मेंचुप
अबकोईछूकेक्यूँँनहींआताउधरसिरेकाजीवन-अंग
जानतेहैंपरक्याबतलाएँलगगईक्यूँँपर्वाज़मेंचुप
फिरयेखेल-तमाशासाराकिसकेलिएऔरक्यूँँसाहब
जबइसकेअंजाममेंचुपहैजबइसकेआग़ाज़मेंचुप
नींद-भरीआँखोंसेचूमादिएनेसूरजकोऔरफिर
जैसेशामकोअबनहींजलनाखींचलीइसअंदाज़मेंचुप
ग़ैब-समयकेज्ञानमेंपागलकितनीतानलगाएगा
जितनेसुरहैंसाज़सेबाहरउससेज़ियादासाज़मेंचुप
  - Obaidullah Aleem
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