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Nirvesh Navodayan
logon ke fenke patthar sahte rahna
logon ke fenke patthar sahte rahna | लोगों के फेंके पत्थर सहते रहना
- Nirvesh Navodayan
लोगों
के
फेंके
पत्थर
सहते
रहना
दरिया
की
फ़ितरत
में
है
बहते
रहना
आख़िर
शे'र
ख़तम
कर
जाने
वाला
हूँ
अच्छा
तुम
लोग
मुक़र्रर
कहते
रहना
- Nirvesh Navodayan
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ये
लोग
कौन
हैं
आख़िर
कहाँ
से
आते
हैं
जो
जिस्म
नोच
के
फिर
बेटियाँ
जलाते
हैं
Shajar Abbas
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
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बोला
अपना
दोस्त
भया
तुम
मुफ़लिस
हो
आँसू
से
बोला
दरिया
तुम
मुफ़लिस
हो
वक़्त
गुज़ारा,
प्यार
किया
और
साथ
रहे
एक
दिन
उसने
बोल
दिया
तुम
मुफ़लिस
हो
लड़का
वो
ही
आज
बना
एक
अफ़सर
है
कहती
थी
जिस
से
दुनिया
तुम
मुफ़लिस
हो
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Nirvesh Navodayan
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बीच
सफ़र
में
यूँँ
रुकना
बतलाता
है
बिन
मतलब
के
साथ
नहीं
चलता
कोई
सानी
कैसे
मिल
जाएगा
फिर
तुम
को
मेरा
तो
हमनाम
नहीं
मिलता
कोई
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Nirvesh Navodayan
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क्या
ही
होगा
रहने
से
मेरे
बन
के
काम
सभी
करने
हैं
जब
उसके
मन
के
मैंने
सारे
के
सारे
गिन
रक्खे
हैं
तिल
चेहरे
के
हों
या
उसकी
गर्दन
के
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Nirvesh Navodayan
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हर
जानिब
हो
कर
आया
हूँ
बातें
हैं
बस
यार
वही
चर्चा
उसके
चहरे
का
या
चहरे
का
श्रंगार
वही
अच्छा
सब
लगता
है
पर
दो
चीजों
का
कायल
हूँ
मैं
खन
खन
तेरे
कंगन
की
औ
पायल
की
झंकार
वही
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Nirvesh Navodayan
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पछताओगे
इक
दिन
जब
तुम
देखोगे
दोस्त,
हमारी
तस्वीर
बड़े
पर्दे
पर
Nirvesh Navodayan
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