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Nirvesh Navodayan
har jaanib ho kar aaya hooñ baatein hain bas yaar vahii
har jaanib ho kar aaya hooñ baatein hain bas yaar vahii | हर जानिब हो कर आया हूँ बातें हैं बस यार वही
- Nirvesh Navodayan
हर
जानिब
हो
कर
आया
हूँ
बातें
हैं
बस
यार
वही
चर्चा
उसके
चहरे
का
या
चहरे
का
श्रंगार
वही
अच्छा
सब
लगता
है
पर
दो
चीजों
का
कायल
हूँ
मैं
खन
खन
तेरे
कंगन
की
औ
पायल
की
झंकार
वही
- Nirvesh Navodayan
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यार
इक
बार
परिंदों
को
हुकूमत
दे
दो
ये
किसी
शहर
को
मक़्तल
नहीं
होने
देंगे
ये
जो
चेहरे
हैं
यहाँ
चाँद
से
चेहरे
'ताबिश'
ये
मिरा
इश्क़
मुकम्मल
नहीं
होने
देंगे
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Abbas Tabish
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दिन
सलीक़े
से
उगा
रात
ठिकाने
से
रही
दोस्ती
अपनी
भी
कुछ
रोज़
ज़माने
से
रही
Nida Fazli
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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शाम
ढलने
से
फ़क़त
शाम
नहीं
ढलती
है
उम्र
ढल
जाती
है
जल्दी
पलट
आना
मेरे
दोस्त
Ashfaq Nasir
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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यार
भी
राह
की
दीवार
समझते
हैं
मुझे
मैं
समझता
था
मेरे
यार
समझते
हैं
मुझे
Shahid Zaki
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मैं
दिल
को
सख़्त
करके
उस
गली
जा
तो
रहा
हूँ
दोस्त
करूँँगा
क्या
अगर
वो
ही
शरारत
पर
उतर
आया
Harsh saxena
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इतना
क्यूँ
डरते
हो
जानाँ
मरने
से
के
ख़तरा
टल
नई
जाता
है
डरने
से
उसके
लिए
पानी
का
मतलब
पानी
है
फिर
आँखों
से
टपके
चाहे
झरने
से
चूम
लिया
उसने
पेशानी
को
ये
कह
कर
मोहब्बत
बढ़ती
है
ऐसा
करने
से
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Nirvesh Navodayan
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दर्द
कमाई
है
यार,
इनाम
नहीं
है
इस
में
इक
पल
का
भी
आराम
नहीं
है
एक
बुरी
बात
कि
मय-ख़ाने
में
हैं
हम
दूजी
ये
के
हाथों
में
जाम
नहीं
है
द्वापर
वाला
प्यार
न
ढूँढ़ों
तो
बेहतर
अब
कोई
राधा,
कोई
श्याम
नहीं
है
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Nirvesh Navodayan
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कितना
भी
मिल
जाए
कम
ही
लगता
है
किसी
किसी
को
रोने
की
आदत
होती
है
Nirvesh Navodayan
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जितनी
ही
ज़्यादा
ऊँचाई
होती
है
बाज़ू
उतनी
गहरी
खाई
होती
है
कुछ
जोड़े
ऊपर
से
बन
के
आते
हैं
साथ
मिरे
हर
पल
तन्हाई
होती
है
वो
मुझ
में
बिल्कुल
ऐसे
ही
है
जैसे
इक
रामायण
में
चौपाई
होती
है
एक
दफ़ा
लड़की
दिल
तोड़े
फिर
देखो
उसके
बाद
शदीद
पढ़ाई
होती
है
बाद
बिछड़
के
उस
सेे
ये
जाना
हमने
अच्छा
होना
एक
बुराई
होती
है
ग़म
पी
कर
आँसू
रोके
जा
सकते
हैं
चीख़
छुपाने
को
शहनाई
होती
है
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Nirvesh Navodayan
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हिज्र
सभी
गर
एक
कहानी
में
मिलते
हम
भी
किसी
तस्वीर
पुरानी
में
मिलते
कोई
रंग
अगर
होता
इनका
तो
फिर
सोचो
कितने
आँसू
पानी
में
मिलते
ढल
जाएगा
इक
दिन
हुस्न
तुम्हारा
जब
सोचोगे
फिर
काश
जवानी
में
मिलते
सच
में
हिज्र
बुरा
होता
तो
हम
जैसे
आज
यहाँ
पे
नहीं
वीरानी
में
मिलते
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Nirvesh Navodayan
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