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Nirvesh Navodayan
kitna bhi mil jaa.e kam hi lagta hai
kitna bhi mil jaa.e kam hi lagta hai | कितना भी मिल जाए कम ही लगता है
- Nirvesh Navodayan
कितना
भी
मिल
जाए
कम
ही
लगता
है
किसी
किसी
को
रोने
की
आदत
होती
है
- Nirvesh Navodayan
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मैं
जिसे
प्यार
का
अंदाज़
समझ
बैठा
हूँ
वो
तबस्सुम
वो
तकल्लुम
तिरी
आदत
ही
न
हो
Sahir Ludhianvi
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धीरे
धीरे
कुछ
भी
आसाँ
नहीं
होता
धीरे
धीरे
बस
आदत
हो
जाती
है
Divy Kamaldhwaj
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वक़्त
रहता
नहीं
कहीं
टिक
कर
आदत
इस
की
भी
आदमी
सी
है
Gulzar
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उसको
भुला
कर
मुझको
ये
मालूम
हुआ
आदत
कैसी
भी
हो
छोड़ी
जा
सकती
है
Nadeem Shaad
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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रूठ
अगर
जाए
तो
फिर
हफ़्तों
रूठे
इक
आदत
उस
में
भी
ग़ज़लों
वाली
थी
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Tanoj Dadhich
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मुझ
को
बीमार
करेगी
तिरी
आदत
इक
दिन
और
फिर
तुझ
से
भी
अच्छा
नहीं
हो
पाऊँगा
Rahul Jha
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मैं
क्या
कहूँ
के
मुझे
सब्र
क्यूँँ
नहीं
आता
मैं
क्या
करूँँ
के
तुझे
देखने
की
आदत
है
Ahmad Faraz
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मुझे
मायूस
भी
करती
नहीं
है
यही
आदत
तिरी
अच्छी
नहीं
है
Javed Akhtar
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एक
आदत
सी
बन
गई
है
तू
और
आदत
कभी
नहीं
जाती
Dushyant Kumar
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ऐसा
नईं,
उन
सेे
प्यार
नहीं
होता
है
मुश्किल
ये
कि
लगातार
नहीं
होता
है
इन
बालों
की
तरतीबी
तक
नई
जाती
इतना
भी
इश्क़
समझदार
नहीं
होता
है
तुम
सेे
मिलने
का
मन,
कैसे
समझाएँ
कि
नहीं
होता
है
यार
नहीं
होता
है
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Nirvesh Navodayan
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मत
पूछो
कैसे
निकला
तिनका
इश्क़
का
आँसू
से
धोई
हमने
आँखें
अपनी
Nirvesh Navodayan
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पहली
बार
ख़ुशी
हुई
है
कुछ
खोने
की
कोई
वजह
नहीं
बाकी
अब
रोने
की
प्यार
कभी
भी
हो
सकता
है
लोगों
को
उम्र
नहीं
होती
है
पागल
होने
की
ऐसा
था
विश्वास
पिया
के
आने
का
सीता
ने
ठुकरा
दी
लंका
सोने
की
फ़िल्म
कहीं
से
भी
दिखती
हो
बढ़िया
पर
सीटें
तेज़ी
से
भरती
हैं
कोने
की
साथ
रहे
हैं
बस
तन्हाई
और
सुख़न
मेरी
तरफ़दारी
हर
पल
इन
दो
ने
की
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Nirvesh Navodayan
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तुम
थे
हम
थे
और
किनारा
तीनों
ने
दिन
साथ
गुज़ारा
दो
लब
साथ
बड़े
जचते
हैं
एक
हमारा
एक
तुम्हारा
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Nirvesh Navodayan
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हर
बार
क़यामत
होती
है
इस
बार
किधर
से
देखूँगा
वो
चाँद
उधर
से
देखेगी,
मैं
चाँद
इधर
से
देखूँगा
Nirvesh Navodayan
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