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Nirvesh Navodayan
tum the ham the aur kinaara
tum the ham the aur kinaara | तुम थे हम थे और किनारा
- Nirvesh Navodayan
तुम
थे
हम
थे
और
किनारा
तीनों
ने
दिन
साथ
गुज़ारा
दो
लब
साथ
बड़े
जचते
हैं
एक
हमारा
एक
तुम्हारा
- Nirvesh Navodayan
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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सवाल
है
घड़ी
ईजाद
करने
वाले
से
मिलायी
पहली
घड़ी
उसने
किस
घड़ी
के
साथ
Raj
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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कभी
चाहत
पे
शक
करते
हुए
ये
भी
नहीं
सोचा
तुम्हारे
साथ
क्यूँ
रहते
अगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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चलो
न
फिर
से
दरिया
के
नज़दीक
चलें
चलो
न
फिर
से
डुबकी
साथ
लगाएँगे
Atul K Rai
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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अच्छा
है
दिल
के
साथ
रहे
पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन
कभी
कभी
इसे
तन्हा
भी
छोड़
दे
Allama Iqbal
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दूर
रहें
तो
याद
बहुत
आती
सब
की
साथ
रहें
तो
घर
में
झगड़े
होते
हैं
Tanoj Dadhich
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एक
काटा
राम
ने
सीता
के
साथ
दूसरा
वनवास
मेरे
नाम
पर
Nasir Shahzad
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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इश्क़
गणित
का
प्रश्न
नहीं
है
जो
इस
में
तुमने
कुछ
भी
सोचा
कुछ
भी
मान
लिया
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Nirvesh Navodayan
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मत
पूछो
कैसे
निकला
तिनका
इश्क़
का
आँसू
से
धोई
हमने
आँखें
अपनी
Nirvesh Navodayan
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नींद
हमें
कब
तक
आयेगी
कब
तक
करवट
बदलेंगे
हम?
Nirvesh Navodayan
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जितनी
ही
ज़्यादा
ऊँचाई
होती
है
बाज़ू
उतनी
गहरी
खाई
होती
है
कुछ
जोड़े
ऊपर
से
बन
के
आते
हैं
साथ
मिरे
हर
पल
तन्हाई
होती
है
वो
मुझ
में
बिल्कुल
ऐसे
ही
है
जैसे
इक
रामायण
में
चौपाई
होती
है
एक
दफ़ा
लड़की
दिल
तोड़े
फिर
देखो
उसके
बाद
शदीद
पढ़ाई
होती
है
बाद
बिछड़
के
उस
सेे
ये
जाना
हमने
अच्छा
होना
एक
बुराई
होती
है
ग़म
पी
कर
आँसू
रोके
जा
सकते
हैं
चीख़
छुपाने
को
शहनाई
होती
है
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Nirvesh Navodayan
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हर
बार
क़यामत
होती
है
इस
बार
किधर
से
देखूँगा
वो
चाँद
उधर
से
देखेगी,
मैं
चाँद
इधर
से
देखूँगा
Nirvesh Navodayan
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