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Nirvesh Navodayan
bola apna dost bhaya tum mufalis ho
bola apna dost bhaya tum mufalis ho | बोला अपना दोस्त भया तुम मुफ़लिस हो
- Nirvesh Navodayan
बोला
अपना
दोस्त
भया
तुम
मुफ़लिस
हो
आँसू
से
बोला
दरिया
तुम
मुफ़लिस
हो
वक़्त
गुज़ारा,
प्यार
किया
और
साथ
रहे
एक
दिन
उसने
बोल
दिया
तुम
मुफ़लिस
हो
लड़का
वो
ही
आज
बना
एक
अफ़सर
है
कहती
थी
जिस
से
दुनिया
तुम
मुफ़लिस
हो
- Nirvesh Navodayan
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मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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कोई
चादर
वफ़ा
नहीं
करती
वक़्त
जब
खींच-तान
करता
है
Unknown
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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ये
मोहब्बत
का
फ़साना
भी
बदल
जाएगा
वक़्त
के
साथ
ज़माना
भी
बदल
जाएगा
Waseem Barelvi
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वक़्त
करता
है
परवरिश
बरसों
हादिसा
एक
दम
नहीं
होता
Qabil Ajmeri
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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सोचा
था
हमने
आज
सँवारेंगे
वक़्त
को
अब
हाथ
में
है
ज़ुल्फ़,
तो
फिर
ज़ुल्फ़
ही
सही
Prakhar Kanha
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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हर
जानिब
हो
कर
आया
हूँ
बातें
हैं
बस
यार
वही
चर्चा
उसके
चहरे
का
या
चहरे
का
श्रंगार
वही
अच्छा
सब
लगता
है
पर
दो
चीजों
का
कायल
हूँ
मैं
खन
खन
तेरे
कंगन
की
औ
पायल
की
झंकार
वही
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Nirvesh Navodayan
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जो
आँखों
से
लब
तक
गर
देख
चुके
हैं
अब
तक
एक
तवील
सफ़र
देख
चुके
हैं
के
उसकी
हाँ
होना
बाकी
है
पर
हम
पहले
ही
उसका
घर
वर
देख
चुके
हैं
सोचो
कि
करें
तो
करें
क्या
वो
लोग
मियाँ
जो
पहले
ही
सब
कुछ
कर
देख
चुके
हैं
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Nirvesh Navodayan
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बरबस
तेरी
ओर
ध्यान
चला
जाता
है
और
फिर
मेरा
ईमान
चला
जाता
है
है
इश्क़
वही
स्टेशन
कि
जहाँ
पर
यारों
सो
गए
गर
तो
सामान
चला
जाता
है
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Nirvesh Navodayan
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कुछ
भी
कैसे
कह
देता
मैं
यार
उसे
के
पहले
था
ही
नहीं
मुझ
सेे
प्यार
उसे
कितने
नखरे
,
कितनी
शर्तें
,
मत
पूछो
फिर
भी
हमने
कर
ही
लिया
तैयार
उसे
हर
लड़के
की
ख्वाहिश
बस
इतनी
सी
के
वो
साड़ी
में
दिख
जाए
इक
बार
उसे
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Nirvesh Navodayan
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वो
इक
तुम्हारा
कमरा
गर
ख़ाली
है
फिर
मेरे
ख़ातिर
सारा
घर
ख़ाली
है
लानत
है
और
हैरत
ऐसे
दिल
पर
के
भारी
भारी
रहता
है
पर
ख़ाली
है
मैं
कैसे
बैठूँ
उसके
बाजू
,
कि
जगह
न
इधर
ख़ाली
है
ना
ही
उधर
ख़ाली
है
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Nirvesh Navodayan
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