kuchh bhi bacha na kehne ko har baat ho gaii | कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई

  - Nida Fazli
कुछभीबचाकहनेकोहरबातहोगई
आओकहींशराबपिएँरातहोगई
फिरयूँँहुआकिवक़्तकापाँसापलटगया
उम्मीदजीतकीथीमगरमातहोगई
सूरजकोचोंचमेंलिएमुर्ग़ाखड़ारहा
खिड़कीकेपर्देखींचदिएरातहोगई
वोआदमीथाकितनाभलाकितनापुर-ख़ुलूस
उससेभीआजलीजेमुलाक़ातहोगई
रस्तेमेंवोमिलाथामैंबचकरगुज़रगया
उसकीफटीक़मीसमिरेसाथहोगई
नक़्शाउठाकेकोईनयाशहरढूँढिए
इसशहरमेंतोसबसेमुलाक़ातहोगई
  - Nida Fazli
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy