बे-नामसायेदर्दठहरक्यूँँनहींजाता
जोबीतगयाहैवोगुज़रक्यूँँनहींजाता
सबकुछतोहैक्याढूँढतीरहतीहैंनिगाहें
क्याबातहैमैंवक़्तपेघरक्यूँँनहींजाता
वोएकहीचेहरातोनहींसारेजहाँमें
जोदूरहैवोदिलसेउतरक्यूँँनहींजाता
मैंअपनीहीउलझीहुईराहोंकातमाशा
जातेहैंजिधरसबमैंउधरक्यूँँनहींजाता
वोख़्वाबजोबरसोंसेनचेहरानबदनहै
वोख़्वाबहवाओंमेंबिखरक्यूँँनहींजाता