शुऊर-ए-ज़ातकेसाँचेमेंढलनाचाहताहूँ
मैंगिरनेसेबहुतपहलेसँभलनाचाहताहूँ
लिबास-ए-आदम-ए-ख़ाकीबदलनाचाहताहूँ
मैंअपनेजिस्मसेबाहरनिकलनाचाहताहूँ
तुम्हारीयादकीबारिशमेंजलनाचाहताहूँ
मैंसंग-ओ-ख़िश्तहूँलेकिनपिघलनाचाहताहूँ
मिरेअंदरख़ज़ानेहैंउगलनाचाहताहूँ
तह-ए-पातालकोछूकरउछलनाचाहताहूँ
मुझेपीछेनहींरहनाहैजीनेकीतमन्ना
हुसैनइब्न-ए-अलीकेसाथचलनाचाहताहूँ