mujhe rifa'aton ka khumaar tha so nahin raha | मुझे रिफ़अ'तों का ख़ुमार था सो नहीं रहा

  - Naeem Zarrar Ahmad
मुझेरिफ़अ'तोंकाख़ुमारथासोनहींरहा
तिरेदोस्तोंमेंशुमारथासोनहींरहा
जिसेअबसमझतेहोबारदीदा-ओ-जानपे
कभीराह-ए-मंज़िल-ए-यारथासोनहींरहा
तिरीयादभीतेरीयादथीसोचलीगई
तिराग़महीमेराक़रारथासोनहींरहा
रह-ए-दोस्तीकेमुसाफ़िरोज़रादेखकर
इसीरहकामैंभीसवारथासोनहींरहा
वोजोपूछतेहैं'नईम'काउसेक्याहुआ
उन्हेंकहदोउनपेनिसारथासोनहींरहा
  - Naeem Zarrar Ahmad
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