koi us zalim ko samjhaata nahin | कोई उस ज़ालिम को समझाता नहीं

  - Nadir Shahjahanpuri
कोईउसज़ालिमकोसमझातानहीं
वोसितमकरनेसेबाज़आतानहीं
दश्त-ए-ग़ममेंकबमिरानक़्श-ए-क़दम
हरक़दमपेआँखदिखलातानहीं
दर्द-ए-फ़ुर्क़तसेज़बाँदाँतोंमेंहै
क्याकहूँकुछभीकहाजातानहीं
चश्म-ए-दिलसेदेखउसेतूदेखले
चश्म-ए-ज़ाहिरसेनज़रआतानहीं
सब्र-ए-शौक़-ए-वस्ल-ए-जानाँक्याकरूँँ
परलगाकरभीउड़ाजातानहीं
कबख़याल-ए-ज़ुल्फ़मेंहररातको
दिलपेमेरेसाँपलहरातानहीं
गुलसेनिस्बतकियातिरेरुख़्सारको
येतोवोगुलहैजोकुम्हलातानहीं
दर्द-ए-फ़ुर्क़तसेहैअबहोंटोंपेदम
फिरभीज़ालिमकोतरसआतानहीं
जानलीहैजल्वा-ए-रुख़सारने
क़ब्रकीज़ुल्मतसेघबरातानहीं
हुस्नकीख़ुद्दारियाँतोदेखिए
बे-ख़ुदीमेंभीवोहाथआतानहीं
वोनहींआतेतोनादिरक्यागला
होशजबदोदोदोपहरआतानहीं
  - Nadir Shahjahanpuri
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