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Nazeer Akbarabadi
jab fagun rang jhamkate hon tab dekh bahaarein holi ki
jab fagun rang jhamkate hon tab dekh bahaarein holi ki | जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की
- Nazeer Akbarabadi
जब
फागुन
रंग
झमकते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
और
दफ़
के
शोर
खड़कते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
- Nazeer Akbarabadi
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अभी
तो
शाम
की
दस्तक
हुई
है
अभी
से
लग
गया
बिस्तर
हमारा
यही
तन्हाई
है
जन्नत
हमारी
इसी
जन्नत
में
है
अब
घर
हमारा
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Vikas Sharma Raaz
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दे
रहे
हैं
लोग
मेरे
दिल
पे
दस्तक
बार
बार
दिल
मगर
ये
कह
रहा
है
सिर्फ़
तू
और
सिर्फ़
तू
Fareeha Naqvi
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मेरा
दस्तक
देना
इतना
अच्छा
लगता
है
उसको
दस्तक
देना
बंद
करूँँ
तो
दरवाज़ा
खुल
जाता
है
Vishnu virat
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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तुझे
ख़याल
नहीं
है
सो
हम
बढ़ा
रहे
हैं
फिर
इक
दफ़ा
तेरी
ज़ानिब
क़दम
बढ़ा
रहे
हैं
बहुत
से
आए
तुझे
जीतने
की
ख़्वाहिश
में
हम
एक
कोने
में
बैठे
रक़म
बढ़ा
रहे
हैं
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Zahid Bashir
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बाज़ार
गली
और
कूचों
में
ग़ुल-शोर
मचाया
होली
ने
दिल
शाद
किया
और
मोह
लिया
ये
जौबन
पाया
होली
ने
Nazeer Akbarabadi
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वो
शांत
बैठा
है
कब
से
मैं
शोर
क्यूँँॅं
न
करूँॅं
बस
एक
बार
वो
कह
दे
कि
चुप
तो
चूँ
न
करूँॅं
Charagh Sharma
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रुके
रुके
से
क़दम
रुक
के
बार
बार
चले
क़रार
दे
के
तिरे
दर
से
बे-क़रार
चले
Gulzar
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मैं
उस
सेे
दूर
था
तो
शोर
था
साजिश
है,
साजिश
है
उसे
बाहों
में
खुलकर
कस
लिया
दो
पल
तो
हंगामा
Kumar Vishwas
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बुरा
मनाया
था
हर
आहट
हर
सरगोशी
का
सोचो
कितना
ध्यान
रखा
उसने
ख़ामोशी
का
तुम
इसका
नुक़सान
बताती
अच्छी
लगती
हो
वरना
हम
को
शौक़
नहीं
है
सिगरेट-नोशी
का
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Khurram Afaq
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मैं
हूँ
पतंग-ए-काग़ज़ी
डोर
है
उस
के
हाथ
में
चाहा
इधर
घटा
दिया
चाहा
उधर
बढ़ा
दिया
Nazeer Akbarabadi
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चली
आती
है
अब
तो
हर
कहीं
बाज़ार
की
राखी
सुनहरी
सब्ज़
रेशम
ज़र्द
और
गुलनार
की
राखी
Nazeer Akbarabadi
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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दिन
जल्दी
जल्दी
चलता
हो
तब
देख
बहारें
जाड़े
की
और
पाला
बर्फ़
पिघलता
हो
तब
देख
बहारें
जाड़े
की
Nazeer Akbarabadi
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है
दसहरे
में
भी
यूँँ
गर
फ़रहत-ओ-ज़ीनत
'नज़ीर'
पर
दिवाली
भी
अजब
पाकीज़ा-तर
त्यौहार
है
Nazeer Akbarabadi
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