duniya ki khwaahishaat men uljha nahin hooñ main | दुनिया की ख़्वाहिशात में उलझा नहीं हूँ मैं

  - Nabiul Hasan Shamim
दुनियाकीख़्वाहिशातमेंउलझानहींहूँमैं
उड़जाएजोहवामेंवोतिनकानहींहूँमैं
बीमारउनकोदेखकेख़ामोशहोगया
इतनाकहाज़बानसेअच्छानहींहूँमैं
आताहैमुझकोमरकज़-ए-तौहीदकाख़याल
मुँहसेनिकलजाएकिबंदानहींहूँमैं
हरदमयहीदु'आहैकिबेताबियाँरहें
येहालहोगयाहैकिअपनानहींहूँमैं
आसाँनहींहैमेरीहक़ीक़तकोजानना
मिलजाएजोसभोंकोवोरस्तानहींहूँमैं
मेरेहीदमसेहैयेमिरेदिलकीबेकली
अपनेमरज़काआपमुदावानहींहूँमैं
हैआफ़ियतमेंजानजोमिलतानहींकोई
अच्छाहैये'शमीम'किअच्छानहींहूँमैं
  - Nabiul Hasan Shamim
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