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Murli Dhakad
isee uljhan men umr saari basar ki
isee uljhan men umr saari basar ki | इसी उलझन में उम्र सारी बसर की
- Murli Dhakad
इसी
उलझन
में
उम्र
सारी
बसर
की
ये
छाया
सूरज
की
है
या
शजर
की
एक
दिन
मैं
अपने
घर
महमान
हुआ
ताक
पर
रख
दी
आवारगी
ज़िन्दगी
भर
की
मैंने
हादसों
से
अपनी
झोली
भर
ली
जैसे
कमाई
हो
किसी
लंबे
सफ़र
की
कोई
इतना
मुतमईन
कैसे
हो
सकता
है
जाम
भी
ना
लिया
ज़िन्दगी
भी
बसर
की
दिन
तो
कयामत
था
गुज़ारा
नहीं
गया
रात
तो
ज़िन्दगी
थी
सो
बसर
की
हाँ
फसाना
तो
मैं
भूल
गया
लेकिन
कुछ
गलियां
याद
है
तेरे
शहर
की
- Murli Dhakad
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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खेल
ही
तो
है
जहाँ
मैं
उसका
हूँ
ज़िन्दगी
ये
ट्वीट
बदलेगी
कभी
Neeraj Neer
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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बताता
हूँ
राह
राहगीरों
को
अब
राह
में
ही
कहीं
खो
गया
हूँ
मैं
मेरे
हाथ
पे
किसी
ने
गुलाब
क्या
रखा
ख़ुशबू
ख़ुशबू
हो
गया
हूँ
मैं
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Murli Dhakad
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और
कोई
ग़म
न
था
क्या
जमाने
में
दिल
दहल
उठा
है
आधे
ही
पैमाने
में
कोई
जन्नत
का
नाम
न
ले
लेना
ख़ुदा
के
साथ
खड़ा
हूँ
वीराने
में
और
भी
हैं
साक़ी
के
तलबगार
और
भी
लोग
हैं
मय-ख़ाने
में
तुम
मुझ
सेे
मेरा
हासिल
पुछते
हो
उम्र
गुज़री
है
तुमको
रिझाने
में
तुम
सीरत
में
मुझ
सेे
जुदा
हो
लेकिन
है
तुम्हारा
दर्द
भी
मेरे
अफ़साने
में
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Murli Dhakad
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जाम
कहने
सुनने
को
कहानी
रह
गया
है
और
पीने
को
बस
पानी
रह
गया
है
Murli Dhakad
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रात
जैसे
जैसे
ढलती
जा
रही
है
कोई
कसक
दिल
में
मचलती
जा
रही
है
कोई
गुनाह
कर
लिया
होता
उम्र
नाहक
ढलती
जा
रही
है
तस्कीन-ए-दिल
की
तलाश
में
मेरी
हैसियत
बदलती
जा
रही
है
नहीं
जुनून
का
मुकाबला
इश्क़
से
हैरत
है
तक़रीर
बदलती
जा
रही
है
'रिंद'
अब
ज़िंदा
नहीं
रहे
शायद
ज़िंदगी
संभलती
जा
रही
है
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Murli Dhakad
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बज़्म-ए-जानाँ
की
रंगत
कुछ
खास
है
लेकिन
आज
रिन्द
की
तबियत
उदास
है
कितनी
आसान
है
आदमी
की
शक्ल
पढ़ता
हूँ
कि
हर
चेहरा
उदास
है
हम
नाचते
गाते
हुए
आते
थे
कभी
आज
स्कूल
से
आते
हुए
बच्चे
उदास
है
फूलों
के
चाहनेवाले
के
शौक
को
देख
मुस्कुराती
हुई
हर
कली
उदास
है
नए
ख़्वाब
की
ता'बीर
हो
चुकी
है
आँखों
में
पुरानी
एक
तस्वीर
उदास
है
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Murli Dhakad
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