isee uljhan men umr saari basar ki | इसी उलझन में उम्र सारी बसर की

  - Murli Dhakad
इसीउलझनमेंउम्रसारीबसरकी
येछायासूरजकीहैयाशजरकी
एकदिनमैंअपनेघरमहमानहुआ
ताकपररखदीआवारगीज़िन्दगीभरकी
मैंनेहादसोंसेअपनीझोलीभरली
जैसेकमाईहोकिसीलंबेसफ़रकी
कोईइतनामुतमईनकैसेहोसकताहै
जामभीनालियाज़िन्दगीभीबसरकी
दिनतोकयामतथागुज़ारानहींगया
राततोज़िन्दगीथीसोबसरकी
हाँफसानातोमैंभूलगयालेकिन
कुछगलियांयादहैतेरेशहरकी
  - Murli Dhakad
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