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Murli Dhakad
raat jaise jaise dhalti ja rahi hai
raat jaise jaise dhalti ja rahi hai | रात जैसे जैसे ढलती जा रही है
- Murli Dhakad
रात
जैसे
जैसे
ढलती
जा
रही
है
कोई
कसक
दिल
में
मचलती
जा
रही
है
कोई
गुनाह
कर
लिया
होता
उम्र
नाहक
ढलती
जा
रही
है
तस्कीन-ए-दिल
की
तलाश
में
मेरी
हैसियत
बदलती
जा
रही
है
नहीं
जुनून
का
मुकाबला
इश्क़
से
हैरत
है
तक़रीर
बदलती
जा
रही
है
'रिंद'
अब
ज़िंदा
नहीं
रहे
शायद
ज़िंदगी
संभलती
जा
रही
है
- Murli Dhakad
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अजीब
सानेहा
मुझ
पर
गुज़र
गया
यारो
मैं
अपने
साए
से
कल
रात
डर
गया
यारो
Shahryar
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इक
रात
उस
ने
चंद
सितारे
बुझा
दिए
उस
को
लगा
था
कोई
उन्हें
गिन
नहीं
रहा
Khurram Afaq
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हमारी
याद
आने
पर
अकेली
रात
में
तुम
भी
कभी
पंखा
कभी
टीवी
कभी
दीवार
देखोगे
Ambar
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रात
बाक़ी
थी
जब
वो
बिछड़े
थे
कट
गई
उम्र
रात
बाक़ी
है
Khumar Barabankvi
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
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Farhat Ehsaas
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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हाल
मीठे
फलों
का
मत
पूछो
रात
दिन
चाकूओं
में
रहते
हैं
Fahmi Badayuni
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इसी
खंडर
में
कहीं
कुछ
दिए
हैं
टूटे
हुए
इन्हीं
से
काम
चलाओ
बड़ी
उदास
है
रात
Firaq Gorakhpuri
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जागना
और
जगा
के
सो
जाना
रात
को
दिन
बना
के
सो
जाना
Ali Zaryoun
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दुनिया
का
तो
पता
नहीं
आदमी
एक
बहाना
है
Murli Dhakad
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जाम
कहने
सुनने
को
कहानी
रह
गया
है
और
पीने
को
बस
पानी
रह
गया
है
Murli Dhakad
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शिखर
पे
चढ़के
बैठे
थे
एहतियात
के
मौसम
सभी
गुजर
गए
बरसात
के
हम
रोशनी
के
तलबगार
लोग
हैं
हम
मुसाफिर
हैं
स्याह
रात
के
नहीं
काँटो
को
भी
ये
मंजूर
फूल
कोई
तोड़ा
जाए
बिना
बात
के
देखिए
महरूम
होते
चले
गए
हैं
मेरे
दोस्त
सभी
मेरी
ज़ात
के
नहीं
है
ग़म-ए-हयात
से
ये
ज़ख़्म
ये
ज़ख़्म
है
ख़ुद
अपने
जज़्बात
के
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Murli Dhakad
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मेरे
नशेमन
में
किसी
तरह
का
अँधेरा
नहीं
है
उस
ख़्वाब
में
न
जी
पाऊँगा
जो
मेरा
नहीं
है
Murli Dhakad
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आबोदाने
के
ख़ातिर
एक
चिड़िया
ख़ुद
पिंजरे
में
आ
बैठती
है
Murli Dhakad
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