tujhe kaise ilm na ho sakaa badi door tak ye khabar gaii | तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई

  - Mumtaz Naseem
तुझेकैसेइल्महोसकाबड़ीदूरतकयेख़बरगई
तिरेशहरहीकीयेशाएरातिरेइंतिज़ारमेंमरगई
कोईबातेंथींकोईथासबबजोमैंवा'दाकरकेमुकरगई
तिरेप्यारपरतोयक़ीनथामैंख़ुदअपनेआपसेडरगई
वोतिरेमिज़ाजकीबातथीयेमिरेमिज़ाजकीबातहै
तूमिरीनज़रसेगिरसकामैंतिरीनज़रसेउतरगई
हैख़ुदागवाहतिरेबिनामिरीज़िंदगीतोकटसकी
मुझेयेबताकिमिरेबिनातिरीउम्रकैसेगुज़रगई
वोसफ़रकोअपनेतमामकर,गईरातआएँगेलौटकर
ये'नसीम'मैंनेसुनीख़बरतोमैंशामहीसेसँवरगई
  - Mumtaz Naseem
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