jise maine subh samajh liya kahii ye bhi shaam-e-alam na ho | जिसे मैंने सुब्ह समझ लिया कहीं ये भी शाम-ए-अलम न हो

  - Mumtaz Naseem
जिसेमैंनेसुब्हसमझलियाकहींयेभीशाम-ए-अलमहो
मिरेसरकीआपनेखाईजोकहींयेभीझूटीक़समहो
वोजोमुस्कुराएहैंबे-सबबयेकरमभीउनकासितमहो
मैंनेप्यारजिसकोसमझलियाकहींयेभीमेराभरमहो
तूजोहस्ब-ए-वादासकातोबहानाऐसानयाबना
कितिरावक़ारभीकमहोमिराए'तिबारभीकमहो
जिसेदेखकरमैंठिठकगईउसेऔरग़ौरसेदेखलूँ
येचमकरहाहैजोआइनाकहींतेरानक़्श-ए-क़दमहो
मिरेमुँहसेनिकलायेबरमलातुझेशादकामराँरखेख़ुदा
तूपयामलायाहैयारकातिरीउम्रख़िज़्रसेकमहो
  - Mumtaz Naseem
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