saanson ke is hunar ko na aasaan khayal kar | साँसों के इस हुनर को न आसाँ ख़याल कर

  - Mohsin Naqvi
साँसोंकेइसहुनरकोआसाँख़यालकर
ज़िंदाहूँसाअ'तोंकोमैंसदियोंमेंढालकर
मालीनेआजकितनीदुआएँवसूलकीं
कुछफूलइकफ़क़ीरकीझोलीमेंडालकर
कुलयौम-ए-हिज्रज़र्दज़मानोंकायौमहै
शबभरजागमुफ़्तमेंआँखेंलालकर
गर्द-बादलौटकेआनाहैफिरमुझे
रखनामिरेसफ़रकीअज़िय्यतसँभालकर
मेहराबमेंदिएकीतरहज़िंदगीगुज़ार
मुँह-ज़ोरआँधियोंमेंख़ुदकोनिढालकर
शायदकिसीनेबुख़्ल-ए-ज़मींपरकियाहैतंज़
गहरेसमुंदरोंसेजज़ीरेनिकालकर
येनक़्द-ए-जाँकिइसकालुटानातोसहलहै
गरबनपड़ेतोइससेभीमुश्किलसवालकर
'मोहसिन'बरहना-सरचलीआईहैशाम-ए-ग़म
ग़ुर्बतदेखइसपेसितारोंकीशालकर
  - Mohsin Naqvi
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