बिछड़ के मुझ से कभी तूने ये भी सोचा है

  - Mohsin Naqvi
बिछड़केमुझसेकभीतूनेयेभीसोचाहै
अधूराचाँदभीकितनाउदासलगताहै
येख़त्म-ए-वस्लकालम्हाहैराएगाँसमझ
किइसकेबादवहीदूरियोंकासहराहै
कुछऔरदेरझड़नाउदासियोंकेशजर
किसेख़बरतेरेसाएमेंकौनबैठाहै
येरख-रखावमुहब्बतसिखागएउसको
वोरूठकरभीमुझेमुस्कुराकेमिलताहै
मैंकिसतरहतुझेदेखूँनज़रझिझकतीहै
तेराबदनहैकियेआइनोंकादरियाहै
कुछइसक़दरभीतोआसाँनहींहैइश्क़तेरा
येज़हरदिलमेंउतरकरहीरासआताहै
मैंतुझकोपाकेभीखोयाहुआसारहताहूँ
कभीकभीतोमुझेतूनेठीकसमझाहै
मुझेख़बरहैकिक्याहैजुदाइयोंकाअज़ाब
किमैंनेशाख़सेगुलकोबिछड़तेदेखाहै
मैंमुस्कुराभीपड़ाहूँतोक्यूँँख़फ़ाहैंयेलोग
किफूलटूटीहुईक़ब्रपरभीखिलताहै
उसेगँवाकेमैंज़िंदाहूँइसतरह'मोहसिन'
किजैसेतेज़हवामेंचराग़जलताहै
  - Mohsin Naqvi
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