zakham ke phool se taskin talab karti hai | ज़ख़्म के फूल से तस्कीन तलब करती है

  - Mohsin Naqvi
ज़ख़्मकेफूलसेतस्कीनतलबकरतीहै
बाज़औक़ातमिरीरूहग़ज़बकरतीहै
जोतिरीज़ुल्फ़सेउतरेहोंमिरेआँगनमें
चाँदनीऐसेअँधेरोंकाअदबकरतीहै
अपनेइंसाफ़कीज़ंजीरदेखोकियहाँ
मुफ़्लिसीज़ेहनकीफ़रियादभीकबकरतीहै
सहन-ए-गुलशनमेंहवाओंकीसदाग़ौरसेसुन
हरकलीमातम-ए-सद-जश्न-ए-तरबकरतीहै
सिर्फ़दिनढलनेपेमौक़ूफ़नहींहै'मोहसिन'
ज़िंदगीज़ुल्फ़केसाएमेंभीशबकरतीहै
  - Mohsin Naqvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy