wusaat-e-saii-e-karam dekh ki sar-ta-sar-e-khaak | वुसअत-ए-सई-ए-करम देख कि सर-ता-सर-ए-ख़ाक

  - Mirza Ghalib
वुसअत-ए-सई-ए-करमदेखकिसर-ता-सर-ए-ख़ाक
गुज़रेहैआबला-पाअब्र-ए-गुहर-बारहुनूज़
यक-क़लमकाग़ज़-ए-आतिश-ज़दाहैसफ़्हा-ए-दश्त
नक़्श-ए-पामेंहैतब-ए-गर्मी-ए-रफ़्तारहुनूज़
दाग़-ए-अतफ़ालहैदीवानाब-कोहसारहुनूज़
ख़ल्वत-ए-संगमेंहैनालातलब-गारहुनूज़
ख़ानाहैसैलसेख़ू-कर्दा-ए-दीदारहुनूज़
दूरबींदर-ज़दाहैरख़्ना-ए-दीवारहुनूज़
आईयक-उम्रसेमअज़ूर-ए-तमाशानर्गिस
चश्म-ए-शबनममेंटूटामिज़ा-ए-ख़ारहुनूज़
क्यूँँहुआथातरफ़-ए-आबला-ए-पाया-रब
जादाहैवा-शुदन-ए-पेचिश-ए-तूमारहुनूज़
होंख़मोशी-ए-चमनहसरत-ए-दीदार'असद'
मिज़ाहैशाना-कश-ए-तुर्रा-ए-गुफ़्तारहुनूज़
  - Mirza Ghalib
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