tu dost kasoo ka bhi sitamgar na hua tha | तू दोस्त कसू का भी सितमगर न हुआ था

  - Mirza Ghalib
तूदोस्तकसूकाभीसितमगरहुआथा
औरोंपेहैवोज़ुल्मकिमुझपरहुआथा
छोड़ामह-ए-नख़शबकीतरहदस्त-ए-क़ज़ाने
ख़ुर्शीदहुनूज़उसकेबराबरहुआथा
तौफ़ीक़ब-अंदाज़ा-ए-हिम्मतहैअज़लसे
आँखोंमेंहैवोक़तराकिगौहरहुआथा
जबतककिदेखाथाक़द-ए-यारकाआलम
मैंमो'तक़िद-ए-फ़ित्ना-ए-महशरहुआथा
मैंसादा-दिलआज़ुर्दगी-ए-यारसेख़ुशहूँ
या'नीसबक़-ए-शौक़मुकर्ररहुआथा
दरिया-ए-मआसीतुनुक-आबीसेहुआख़ुश्क
मेरासर-ए-दामनभीअभीतरहुआथा
जारीथी'असद'दाग़-ए-जिगरसेमिरीतहसील
आतिश-कदाजागीर-ए-समुंदरहुआथा
  - Mirza Ghalib
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