husn-e-mah garche b-hangaam-e-kamaal achha haius se miraa mah-e-khursheed-jamaal achha hai | हुस्न-ए-मह गरचे ब-हंगाम-ए-कमाल अच्छा है

  - Mirza Ghalib
हुस्न-ए-महगरचेब-हंगाम-ए-कमालअच्छाहै
उससेमेरामह-ए-ख़ुर्शीद-जमालअच्छाहै
बोसादेतेनहींऔरदिलपेहैहरलहज़ानिगाह
जीमेंकहतेहैंकिमुफ़्तआएतोमालअच्छाहै
औरबाज़ारसेलेआएअगरटूटगया
साग़र-ए-जमसेमिराजाम-ए-सिफ़ालअच्छाहै
बे-तलबदेंतोमज़ाउसमेंसिवामिलताहै
वोगदाजिसकोहोख़ू-ए-सवालअच्छाहै
उनकेदेखेसेजोजातीहैमुँहपररौनक़
वोसमझतेहैंकिबीमारकाहालअच्छाहै
देखिएपातेहैंउश्शाक़बुतोंसेक्याफ़ैज़
इकबरहमननेकहाहैकियेसालअच्छाहै
हम-सुख़नतेशानेफ़रहादकोशीरींसेकिया
जिसतरहकाकिकिसीमेंहोकमालअच्छाहै
क़तरादरियामेंजोमिलजाएतोदरियाहोजाए
कामअच्छाहैवोजिसकाकिमआलअच्छाहै
ख़िज़्र-सुल्ताँकोरखेख़ालिक़-ए-अकबरसरसब्ज़
शाहकेबाग़मेंयेताज़ानिहालअच्छाहै
हमकोमालूमहैजन्नतकीहक़ीक़तलेकिन
दिलकेख़ुशरखनेको'ग़ालिब'येख़यालअच्छाहै
  - Mirza Ghalib
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy