rone se aur ishq men bebaak ho ga.e | रोने से और इश्क़ में बेबाक हो गए

  - Mirza Ghalib
रोनेसेऔरइश्क़मेंबेबाकहोगए
धोएगएहमइतनेकिबसपाकहोगए
सर्फ़-ए-बहा-ए-मयहुएआलात-ए-मय-कशी
थेयेहीदोहिसाबसोयूँँपाकहोगए
रुस्वा-ए-दहरगोहुएआवारगीसेतुम
बारेतबीअतोंकेतोचालाकहोगए
कहताहैकौननाला-ए-बुलबुलकोबे-असर
पर्देमेंगुलकेलाखजिगरचाकहोगए
पूछेहैक्यावजूदअदमअहल-ए-शौक़का
आपअपनीआगकेख़स-ओ-ख़ाशाकहोगए
करनेगएथेउससेतग़ाफ़ुलकाहमगिला
कीएकहीनिगाहकिबसख़ाकहोगए
इसरंगसेउठाईकलउसने'असद'कीना'श
दुश्मनभीजिसकोदेखकेग़मनाकहोगए
  - Mirza Ghalib
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