saraapa rehn-ishq-o-na-guzir-ulfat-hasti | सरापा रेहन-इश्क़-ओ-ना-गुज़ीर-उल्फ़त-हस्ती

  - Mirza Ghalib
सरापारेहन-इश्क़-ओ-ना-गुज़ीर-उल्फ़त-हस्ती
इबादतबर्क़कीकरताहूँऔरअफ़्सोसहासिलका
ब-क़द्र-ए-ज़र्फ़हैसाक़ीख़ुमार-ए-तिश्ना-कामीभी
जोतूदरिया-ए-मैहैतोमैंख़म्याज़ाहूँसाहिलका
ज़ि-बसखूँ-गश्त-ए-रश्क-ए-वफ़ाथावहमबिस्मिलका
चुरायाज़ख़्म-हा-ए-दिलनेपानीतेग़-ए-क़ातिलका
निगाह-ए-चश्म-ए-हासिदवामलेज़ौक़-ए-ख़ुद-बीनी
तमाशाईहूँवहदत-ख़ाना-ए-आईना-ए-दिलका
शरर-फ़ुर्सतनिगहसामान-ए-यक-आलमचराग़ाँहै
ब-क़द्र-ए-रंगयाँगर्दिशमेंहैपैमानामहफ़िलका
सरासरताख़तनकोशश-जिहतयक-अर्साजौलाँथा
हुआवामांदगीसेरह-रवाँकीफ़र्क़मंज़िलका
मुझेराह-ए-सुख़नमेंख़ौफ़-ए-गुम-राहीनहींग़ालिब
असा-ए-ख़िज़्र-ए-सहरा-ए-सुख़नहैख़ामाबे-दिलका
  - Mirza Ghalib
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