siyaahi jaise gir jaa.e dam-e-tahreer kaaghaz par | सियाही जैसे गिर जाए दम-ए-तहरीर काग़ज़ पर

  - Mirza Ghalib
सियाहीजैसेगिरजाएदम-ए-तहरीरकाग़ज़पर
मिरीक़िस्मतमेंयूँँतस्वीरहैशब-हा-ए-हिज्राँकी
कहूँक्यागर्म-जोशीमय-कशीमेंशोला-रूयाँकी
किशम-ए-ख़ाना-ए-दिलआतिश-ए-मयसेफ़रोज़ाँकी
हमेशामुझकोतिफ़्लीमेंभीमश्क़-ए-तीरह-रोज़ीथी
सियाहीहैमिरेअय्याममेंलौह-ए-दबिस्ताँकी
दरेग़आह-ए-सहर-गहकार-ए-बाद-ए-सुब्हकरतीहै
किहोतीहैज़ियादासर्द-मेहरीशम्अ-रूयाँकी
मुझेअपनेजुनूँकीबे-तकल्लुफ़पर्दा-दारीथी
व-लेकिनक्याकरूँँआवेजोरुस्वाईगरेबाँकी
हुनरपैदाकियाहैमैंनेहैरत-आज़माईमें
किजौहरआइनेकाहरपलकहैचश्म-ए-हैराँकी
ख़ुदायाकिसक़दरअहल-ए-नज़रनेख़ाकछानीहै
किहैंसद-रख़्नाजूँग़िर्बालदीवारेंगुलिस्ताँकी
हुआशर्म-ए-तही-दस्तीसेसेवोभीसर-निगूँआख़िर
बसज़ख़्म-ए-जिगरअबदेखलेशोरिशनमक-दाँकी
बयाद-ए-गर्मी-ए-सोहबतब-रंग-ए-शोलादहकेहै
छुपाऊँक्यूँँकि'ग़ालिब'सोज़िशेंदाग़-ए-नुमायाँकी
जुनूँतोहमत-कश-ए-तस्कींहोगरशादमानीकी
नमक-पाश-ए-ख़राश-ए-दिलहैलज़्ज़तज़िंदगानीकी
कशाकश-हा-ए-हस्तीसेकरेक्यासई-ए-आज़ादी
हुइज़ंजीर-ए-मौज-ए-आबकोफ़ुर्सतरवानीकी
खींचसई-ए-दस्त-ए-ना-रसाज़ुल्फ़-ए-तमन्नाको
परेशाँ-तरहैमू-ए-ख़ामासेतदबीरमानीकी
कहाँहमभीरग-ओ-पैरखतेहैंइंसाफ़बहत्तरहै
खींचेताक़त-ए-ख़म्याज़ातोहमतना-तवानीकी
तकल्लुफ़-बरतरफ़फ़रहादऔरइतनीसुबु-दस्ती
ख़यालआसाँथालेकिनख़्वाब-ए-ख़ुसरवनेगिरानीकी
पस-अज़-मुर्दनभीदीवानाज़ियारत-गाह-ए-तिफ़्लाँहै
शरार-ए-संगनेतुर्बतपेमेरीगुल-फ़िशानीकी
'असद'कोबोरिएमेंधरकेफूँकामौज-ए-हस्तीने
फ़क़ीरीमेंभीबाक़ीहैशरारतनौजवानीकी
  - Mirza Ghalib
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