ki vafaa ham se to gair is ko jafaa kahte hain | की वफ़ा हम से तो ग़ैर इस को जफ़ा कहते हैं

  - Mirza Ghalib
कीवफ़ाहमसेतोग़ैरइसकोजफ़ाकहतेहैं
होतीआईहैकिअच्छोंकोबुराकहतेहैं
आजहमअपनीपरेशानी-ए-ख़ातिरउनसे
कहनेजातेतोहैंपरदेखिएक्याकहतेहैं
अगलेवक़्तोंकेहैंयेलोगइन्हेंकुछकहो
जोमयनग़्माकोअंदोह-रुबाकहतेहैं
दिलमेंजाएहैहोतीहैजोफ़ुर्सतग़शसे
औरफिरकौनसेनालेकोरसाकहतेहैं
हैपर-ए-सरहद-ए-इदराकसेअपनामसजूद
क़िबलेकोअहल-ए-नज़रक़िबला-नुमाकहतेहैं
पा-ए-अफ़गारपेजबसेतुझेरहमआयाहै
ख़ार-ए-रहकोतिरेहममेहर-ए-गियाकहतेहैं
इकशररदिलमेंहैउससेकोईघबराएगाक्या
आगमतलूबहैहमकोजोहवाकहतेहैं
देखिएलातीहैउसशोख़कीनख़वतक्यारंग
उसकीहरबातपेहमनाम-ए-ख़ुदाकहतेहैं
'वहशत''शेफ़्ता'अबमर्सियाकहवेंशायद
मरगया'ग़ालिब'-ए-आशुफ़्ता-नवाकहतेहैं
  - Mirza Ghalib
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