ग़ुंचा-ए-ना-शगुफ़्ताकोदूरसेमतदिखाकियूँँ
बोसेकोपूछताहूँमैंमुँहसेमुझेबताकियूँँ
पुर्सिश-ए-तर्ज़-ए-दिलबरीकीजिएक्याकिबिनकहे
उसकेहरएकइशारेसेनिकलेहैयेअदाकियूँँ
रातकेवक़्तमयपिएसाथरक़ीबकोलिए
आएवोयाँख़ुदाकरेपरनकरेख़ुदाकियूँँ
ग़ैरसेरातक्याबनीयेजोकहातोदेखिए
सामनेआनबैठनाऔरयेदेखनाकियूँँ
बज़्ममेंउसकेरू-ब-रूक्यूँँनख़मोशबैठिए
उसकीतोख़ामुशीमेंभीहैयहीमुद्दआकियूँँ
मैंनेकहाकिबज़्म-ए-नाज़चाहिएग़ैरसेतही
सुनकेसितम-ज़रीफ़नेमुझकोउठादियाकियूँँ
मुझसेकहाजोयारनेजातेहैंहोशकिसतरह
देखकेमेरीबे-ख़ुदीचलनेलगीहवाकियूँँ
कबमुझेकू-ए-यारमेंरहनेकीवज़्अयादथी
आइना-दारबनगईहैरत-ए-नक़्श-ए-पाकियूँँ
गरतिरेदिलमेंहोख़यालवस्लमेंशौक़काज़वाल
मौजमुहीत-ए-आबमेंमारेहैदस्त-ओ-पाकियूँँ
जोयेकहेकिरेख़्ताक्यूँँकेहोरश्क-ए-फ़ारसी
गुफ़्ता-ए-'ग़ालिब'एकबारपढ़केउसेसुनाकियूँँ