aaina dekh apna sa munh le ke rah ga.e | आईना देख अपना सा मुँह ले के रह गए

  - Mirza Ghalib
आईनादेखअपनासामुँहलेकेरहगए
साहबकोदिलदेनेपेकितनाग़ुरूरथा
क़ासिदकोअपनेहाथसेगर्दनमारिए
उसकीख़तानहींहैयेमेराक़ुसूरथा
ज़ोफ़-ए-जुनूँकोवक़्त-ए-तपिशदरभीदूरथा
इकघरमेंमुख़्तसरबयाबाँज़रूरथा
वाए-ग़फ़लत-ए-निगह-ए-शौक़वर्नायाँ
हरपारासंगलख़्त-ए-दिल-ए-कोह-ए-तूरथा
दर्स-ए-तपिशहैबर्क़कोअबजिसकेनामसे
वोदिलहैयेकिजिसकातख़ल्लुससुबूरथा
हररंगमेंजला'असद'-ए-फ़ित्ना-इन्तिज़ार
परवाना-ए-तजल्ली-ए-शम-ए-ज़ुहूरथा
शायदकिमरगयातिरेरुख़्सारदेखकर
पैमानारातमाहकालबरेज़-ए-नूरथा
जन्नतहैतेरीतेग़केकुश्तोंकीमुंतज़िर
जौहरसवाद-ए-जल्वा-ए-मिज़्गान-ए-हूरथा
  - Mirza Ghalib
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