be-e'tidaaliyon se subuk sab men ham hue | बे-ए'तिदालियों से सुबुक सब में हम हुए

  - Mirza Ghalib
बे-ए'तिदालियोंसेसुबुकसबमेंहमहुए
जितनेज़ियादाहोगएउतनेहीकमहुए
पिन्हाँथादामसख़्तक़रीबआशियानके
उड़नेपाएथेकिगिरफ़्तारहमहुए
हस्तीहमारीअपनीफ़नापरदलीलहै
याँतकमिटेकिआपहमअपनीक़समहुए
सख़्तीकशान-ए-इश्क़कीपूछेहैक्याख़बर
वोलोगरफ़्तारफ़्तासरापाअलमहुए
तेरीवफ़ासेक्याहोतलाफ़ीकिदहरमें
तेरेसिवाभीहमपेबहुतसेसितमहुए
लिखतेरहेजुनूँकीहिकायात-ए-ख़ूँ-चकाँ
हर-चंदइसमेंहाथहमारेक़लमहुए
अल्लाहरेतेरीतुंदी-ए-ख़ूजिसकेबीमसे
अजज़ा-ए-नालादिलमेंमिरेरिज़्क़-ए-हमहुए
अहल-ए-हवसकीफ़त्हहैतर्क-ए-नबर्द-ए-इश्क़
जोपाँवउठगएवहीउनकेअलमहुए
नालेअदममेंचंदहमारेसुपुर्दथे
जोवाँखिंचसकेसोवोयाँकेदमहुए
छोड़ी'असद'हमनेगदाईमेंदिल-लगी
साइलहुएतोआशिक़-ए-अहल-ए-करमहुए
  - Mirza Ghalib
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