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Moni Gopal Tapish
teri qurbat ho to kuchh der qaraar aata hai
teri qurbat ho to kuchh der qaraar aata hai | तेरी क़ुर्बत हो तो कुछ देर क़रार आता है
- Moni Gopal Tapish
तेरी
क़ुर्बत
हो
तो
कुछ
देर
क़रार
आता
है
फिर
वही
मैं
वही
तन्हाई
का
दोज़ख़
मेरा
- Moni Gopal Tapish
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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कुछ
तो
तन्हाई
की
रातों
में
सहारा
होता
तुम
न
होते
न
सही
ज़िक्र
तुम्हारा
होता
Akhtar Shirani
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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तमाम
नाख़ुदा
साहिल
से
दूर
हो
जाएँ
समुंदरों
से
अकेले
में
बात
करनी
है
Tehzeeb Hafi
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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मैं
अपने
चारों
तरफ़
हूँ
और
इस
तरह
का
हुजूम
अजीब
किस्म
की
तन्हाई
साथ
लाता
है
Abhishek shukla
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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एक
अरसे
तक
अकेले
हम
चले
फिर
हमारा
नाम
चलने
लग
गया
Tanoj Dadhich
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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नीम
बिस्मिल
हवा
आरज़ी
तौर
पर
साँस
लेती
रही
सांँवला
एक
मौसम
दरख़्तों
की
शाख़ों
पे
रक्खा
रहा
Moni Gopal Tapish
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सबको
अपना
इश्क़
बताना
रोना-धोना
चिल्लाना
जो
जी
चाहे
कर
सकता
है
वो
अपनी
नादानी
में
अश्कों
की
अपनी
बोली
है
ख़ामोशी
की
कहन
जुदा
कुछ
तस्वीरें
आख़िर
आग
लगा
देती
हैं
पानी
में
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Moni Gopal Tapish
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मेरी
चाहतों
की
तपिश
तुझे,
कभी
आँच
बनके
निखारती
तेरा
जिस्म
सोने
का
था
मगर,
मेरे
हाथ
से
ये
हुनर
गया
Moni Gopal Tapish
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तू
समझ
सके
कभी
मुझको
मेरी
निगाह
से,
कभी
यूँँ
भी
हो
कि
ये
ख़्वाब
था
मेरी
आँख
में,
गई
रात
चुपके
से
मर
गया
Moni Gopal Tapish
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ग़मों
की
भीड़
दर्दों
की
निगहबानी
में
रहना
है
बता
ऐ
ज़िन्दगी
कब
तक
परेशानी
में
रहना
है
वो
अपने
कौ़ल
से
वापस
पलट
जाए
उसे
हक़
है
'तपिश'
हमको
तो
अपनी
बात
के
पानी
में
रहना
है
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Moni Gopal Tapish
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