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Moni Gopal Tapish
meri chaahaton ki tapish tujhe kabhi aanch banke nikhaarti
meri chaahaton ki tapish tujhe kabhi aanch banke nikhaarti | मेरी चाहतों की तपिश तुझे, कभी आँच बनके निखारती
- Moni Gopal Tapish
मेरी
चाहतों
की
तपिश
तुझे,
कभी
आँच
बनके
निखारती
तेरा
जिस्म
सोने
का
था
मगर,
मेरे
हाथ
से
ये
हुनर
गया
- Moni Gopal Tapish
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देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
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Abbas Tabish
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निगल
ही
चुका
था
जफ़ा
का
निवाला
अना
फिर
तमाशा
नया
कर
रही
है
Amaan Pathan
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बेवफ़ाई
ने
तिरी
मुझको
दिया
है
ये
हुनर
बस
यार
दुनिया
में
कहाँ
हर
भाग्य
में
ये
फ़न
लिखा
है
Harsh saxena
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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वो
जिस
घमंड
से
बिछड़ा
गिला
तो
इस
का
है
कि
सारी
बात
मोहब्बत
में
रख-रखाव
की
थी
Ahmad Faraz
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उधारी
सर
से
ऊपर
बढ़
चुकी
है
हमारी
जान
जोखिम
में
पड़ी
है
हमीं
अपमान
सहकर
जी
रहे
हैं
अना
की
लाश
पंखे
पर
मिली
है
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Vikas Sahaj
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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पुरानी
कश्ती
को
पार
लेकर
फ़क़त
हमारा
हुनर
गया
है
नए
खेवइये
कहीं
न
समझें
नदी
का
पानी
उतर
गया
है
Uday Pratap Singh
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ये
हुनर
जो
आ
जाए,
आपका
ज़माना
है
पाँव
किसके
छूने
हैं,
सर
कहाँ
झुकाना
है
Astitwa Ankur
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अपने
ही
ख़ून
में
ये
जिस्म
नहाएा
अक्सर
मैंने
हिस्सा
कभी
माँगा
नहीं
पाया
अक्सर
लोग
लफ़्ज़ों
को
भी
जागीर
समझ
लेते
हैं
मैंने
लहजा
भी
बनाया
तो
मिटाया
अक्सर
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Moni Gopal Tapish
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एक
ग़ज़ल
फिर
कहना
चाहूँ
तेरे-मेरे
प्यार
के
नाम
आधा
तेरी
जीत
का
क़िस्सा
आधा
मेरी
हार
के
नाम
इश्क़
मुहब्बत
के
अफ़साने,रांझा
,मजनूँ
या
फ़रहाद
सब
गुल
बूटे
ख़ुशबू
वाले
लेकिन
हैं
तलवार
के
नाम
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Moni Gopal Tapish
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कितनी
शा
में
तेरी
आमदो
रफ़्त
से
जगमगाई
रहीं
कितनी
सुब्हों
के
चेहरे
पे
बस
इक
तेरा
नाम
लिक्खा
रहा
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Moni Gopal Tapish
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तू
समझ
सके
कभी
मुझको
मेरी
निगाह
से,
कभी
यूँँ
भी
हो
कि
ये
ख़्वाब
था
मेरी
आँख
में,
गई
रात
चुपके
से
मर
गया
Moni Gopal Tapish
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सबको
अपना
इश्क़
बताना
रोना-धोना
चिल्लाना
जो
जी
चाहे
कर
सकता
है
वो
अपनी
नादानी
में
अश्कों
की
अपनी
बोली
है
ख़ामोशी
की
कहन
जुदा
कुछ
तस्वीरें
आख़िर
आग
लगा
देती
हैं
पानी
में
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Moni Gopal Tapish
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