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Moni Gopal Tapish
neem bismil hawa aarzi taur par saans letii rahi
neem bismil hawa aarzi taur par saans letii rahi | नीम बिस्मिल हवा आरज़ी तौर पर साँस लेती रही
- Moni Gopal Tapish
नीम
बिस्मिल
हवा
आरज़ी
तौर
पर
साँस
लेती
रही
सांँवला
एक
मौसम
दरख़्तों
की
शाख़ों
पे
रक्खा
रहा
- Moni Gopal Tapish
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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इसे
तो
वक़्त
की
आब-ओ-हवा
ही
ठीक
कर
देगी
मियाँ
नासूर
होते
ज़ख़्म
सहलाया
नहीं
करते
shaan manral
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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कितनी
शा
में
तेरी
आमदो
रफ़्त
से
जगमगाई
रहीं
कितनी
सुब्हों
के
चेहरे
पे
बस
इक
तेरा
नाम
लिक्खा
रहा
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Moni Gopal Tapish
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तू
कि
रौशन
दिए
की
महक
की
तरह,सर्द
रातों
के
दिल
में
लहकता
हुआ
मैं
कि
सूरज
का
टुकड़ा
मगर
बुझ
गया,
शाम
के
दर
पे
आख़िर
सिसकता
हुआ
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Moni Gopal Tapish
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ख़ूब
गहरी
ख़ूब
गहरी
ख़ूब
गहरी
है
ख़मोशी
चुप
में
जो
मानी
छिपा
है
वो
कहाँ
गोयाई
में
है
Moni Gopal Tapish
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मैं
दिल
भेजूँ
नज़र
भेजूँ
तड़प
भेजूँ
असर
भेजूँ
कहीं
माँगे
गए
हैं
शे'र
अच्छे
मेरी
ग़ज़लों
के
Moni Gopal Tapish
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तू
समझ
सके
कभी
मुझको
मेरी
निगाह
से,
कभी
यूँँ
भी
हो
कि
ये
ख़्वाब
था
मेरी
आँख
में,
गई
रात
चुपके
से
मर
गया
Moni Gopal Tapish
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