ख़राबीकुछनपूछोमुलकत-ए-दिलकीइमारतकी
ग़मोंनेआज-कलसुनियोवोआबादीहीग़ारतकी
निगाह-ए-मस्तसेजबचश्मनेइसकीइशारतकी
हलावतमयकीऔरबुनियादमयख़ानेकीग़ारतकी
सहर-गहमैंनेपूछागुलसेहाल-ए-ज़ारबुलबुलका
पड़ेथेबाग़मेंयक-मुशतपरऊधरइशारतकी
जलायाजिसतजल्ली-ए-जल्वा-गरनेतूरकोहम-दम
उसीआतिशकेपरकालेनेहमसेभीशरारतकी
नज़ाकतक्याकहूँख़ुर्शीद-रूकीकलशब-ए-महमें
गयाथासाएसाएबाग़तकतिसपरहरारतकी
नज़रसेजिसकीयूसुफ़सागयाफिरउसकोक्यासूझे
हक़ीक़तकुछनपूछोपीर-ए-कनआँ'कीबसारतकी
तिरेकूचेकेशौक़-ए-तौफ़मेंजैसेबगूलाथा
बयाबाँमैंग़ुबार'मीर'कीहमनेज़ियारतकी