ha | हमें आमद-ए-'मीर' कल भा गई

  - Meer Taqi Meer
हमेंआमद-ए-'मीर'कलभागई
तरहइसमेंमजनूँकीसबपागई
कहाँकाग़ुबार-ए-आहदिलमेंयेथा
मिरीख़ाकबदलीसीसबछागई
क्यापासबुलबुल-ए-ख़िज़ाँनेकुछ
गुल-ओ-बर्गबे-दर्दफैलागई
हुईसामनेयूँँतोएकएकके
हमेंसेवोकुछआँखशर्मागई
जिगरमुँहतकआतेनहींबोलते
ग़रज़हमभीकरतेहैंक्याक्यागई
हम-रहकोईनाकसीसेगया
मिरीलाशता-गोरतन्हागई
घटाशम्अ'साँक्यूँँजाऊँचला
तब-ए-ग़मजिगरकोमिरेखागई
कोईरहनेवालीहैजानअज़ीज़
गईगरइमरोज़फ़र्दागई
किएदस्त-ओ-पागुमजो'मीर'गया
वफ़ा-पेशामज्लिसउसेपागई
  - Meer Taqi Meer
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