kal shab-e-hijraan thii lab par naala bimaarana tha | कल शब-ए-हिज्राँ थी लब पर नाला बीमाराना था

  - Meer Taqi Meer
कलशब-ए-हिज्राँथीलबपरनालाबीमारानाथा
शामसेतासुब्हदम-ए-बालींपेसरयकजाथा
शोहरा-ए-आलमउसेयुम्न-ए-मोहब्बतनेकिया
वर्नामजनूँएकख़ाकउफ़्तादा-ए-वीरानाथा
मंज़िलउसमहकीरहाजोमुद्दतोंहम-नशीं
अबवोदिलगोयाकिइकमुद्दतकामातम-ख़ानाथा
इकनिगाह-ए-आश्नाकोभीवफ़ाकरतानहीं
वाहुईंमिज़्गाँकिसब्ज़ासब्ज़ा-ए-बेगानाथा
रोज़शबगुज़रेहैपेच-ओ-ताबमेंरहतेतुझे
दिल-ए-सद-चाककिसकीज़ुल्फ़कातूशानाथा
यादअय्या
मेंकिअपनेरोज़शबकीजा-ए-बाश
यादर-ए-बाज़-ए-बयाबाँयादर-ए-मय-ख़ानाथा
जिसकोदेखाहमनेइसवहशत-कदेमेंदहरके
यासिड़ीयाख़ब्तीयामजनूनयादीवानाथा
बादख़ूँ-रेज़ीकेमुद्दतबे-हिनारंगींरहा
हाथउसकाजोमिरेलोहूमेंगुस्ताख़ानाथा
ग़ैरकेकहनेसेमाराउननेहमकोबे-गुनाह
येसमझावोकिवाक़ेमेंभीकुछथायाथा
सुब्हहोतेवोबिना-गोशआजयादआयामुझे
जोगिरादामनपेआँसूगौहर-ए-यक-दानाथा
शबफ़रोग़-ए-बज़्मकाबाइसहुआथाहुस्न-ए-दोस्त
शम्अकाजल्वाग़ुबार-ए-दीदा-ए-परवानाथा
रातउसकीचश्म-ए-मयगूँख़्वाबमेंदेखीथीमैं
सुब्हसोतेसेउठातोसामनेपैमानाथा
रहमकुछपैदाकियाशायदकिउसबे-रहमने
गोशउसकाशबइधरताआख़िर-ए-अफ़्सानाथा
'मीर'भीक्यामस्तताफ़ेहथाशराब-ए-इश्क़का
लबपे'आशिक़केहमेशानारा-ए-मस्तानाथा
  - Meer Taqi Meer
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