ghairoon se mil chale tum mast-e-sharaab ho kar | ग़ैरों से मिल चले तुम मस्त-ए-शराब हो कर

  - Meer Taqi Meer
ग़ैरोंसेमिलचलेतुममस्त-ए-शराबहोकर
ग़ैरतसेरहगएहमयकसूकबाबहोकर
उसरू-ए-आतिशींसेबुर्क़ासरकगयाथा
गुलबहगयाचमनमेंख़जलतसेआबहोकर
कलरातमुँदगईथींबहुतोंकीआँखेंग़शसे
देखाकियाकरतोसरमस्तख़्वाबहोकर
पर्दारहेगाक्यूँँकरख़ुर्शीद-ए-ख़ावरीका
निकलेहैवोभीअबबे-नक़ाबहोकर
यकक़तराआबमैंनेइसदौरमेंपियाहै
निकलाहैचश्म-ए-तरसेवोख़ून-ए-नाबहोकर
बैठताथासूफ़ीहरसुब्हमय-कदेमें
शुक्र-ए-ख़ुदाकिनिकलावाँसेख़राबहोकर
शर्म-ओ-हयाकहाँतकहैं'मीर'कोईदिनके
अबतोमिलाकरोतुमटुकबे-हिजाबहोकर
  - Meer Taqi Meer
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