galat hai ishq men ai bul-hawas andesha raahat ka | ग़लत है इश्क़ में ऐ बुल-हवस अंदेशा राहत का

  - Meer Taqi Meer
ग़लतहैइश्क़मेंबुल-हवसअंदेशाराहतका
रिवाजइसमुल्कमेंहैदर्द-ओ-दाग़-ओ-रंज-ओ-कुलफ़तका
ज़मींइकसफ़्हा-ए-तस्वीरबे-होशाँसेमानाहै
येमज्लिसजबसेहैअच्छानहींकुछरंगसोहबतका
जहाँजल्वेसेउसमहबूबकेयकसरलबालबहै
नज़रपैदाकरअव्वलफिरतमाशादेखक़ुदरतका
हनूज़आवारा-ए-लैलाहैजान-ए-रफ़्तामजनूँकी
मूएपरभीरहाहोतानहींवाबस्ताउल्फ़तका
हरीफ़-ए-बे-जिगरहैसब्रवर्नाकलकीसोहबतमें
नियाज़-ओ-नाज़काझगड़ागिरोथाएकजुरअतका
निगाह-ए-यासभीइससैद-ए-अफ़्गनपरग़नीमतहै
निहायततंगहैसैद-ए-बिस्मिलवक़्तफ़ुर्सतका
ख़राबीदिलकीइसहदहैकियेसमझानहींजाता
किआबादीभीयाँथीयाकिवीरानाथामुद्दतका
निगाह-ए-मस्तनेउसकीलुटाईख़ानकासारी
पड़ाहैबरहमअबतककारख़ानाज़ोहद-ओ-ताअतका
क़दमटकदेखकररख'मीर'सरदिलसेनिकालेगा
पलकसेशोख़-तरकाँटाहैसहरा-ए-मोहब्बतका
  - Meer Taqi Meer
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