talwaar ghark-e-khoon hai aañkhen gulaabiyaan hain | तलवार ग़र्क़-ए-ख़ूँ है आँखें गुलाबियाँ हैं

  - Meer Taqi Meer
तलवारग़र्क़-ए-ख़ूँहैआँखेंगुलाबियाँहैं
देखेंतोतेरीकबतकयेबद-शराबियाँहैं
जबलेनक़ाबमुँहपरतबदीदकरकिक्याक्या
दर-पर्दाशोख़ियाँहैंफिरबे-हिजाबियाँहैं
चाहेहैआजहूँमैंहफ़्त-आसमाँकेऊपर
दिलकेमिज़ाजमेंभीकितनीशिताबियाँहैं
जीबिखरेदिलढहेहैसरभीगिरापड़ेहै
ख़ाना-ख़राबतुझबिनक्याक्याख़राबियाँहैं
मेहमान'मीर'मतहोख़्वान-ए-फ़लकपेहरगिज़
ख़ालीयेमेहर-ओ-महकीदोनोंरिकाबियाँहैं
  - Meer Taqi Meer
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