ham hain majrooh maajra hai ye | हम हैं मजरूह माजरा है ये

  - Meer Taqi Meer
हमहैंमजरूहमाजराहैये
वोनमकछिड़केहैमज़ाहैये
आगथेइब्तिदा-ए-इश्क़मेंहम
अबजोहैंख़ाकइंतिहाहैये
बूदआदमनुमूदशबनमहै
एकदोदममेंफिरहुआहैये
शुक्रउसकीजफ़ाकाहोसका
दिलसेअपनेहमेंगिलाहैये
शोरसेअपनेहश्रहैपर्दा
यूँँनहींजानताकिकियाहैये
बसहुआनाज़होचुकाअग़माज़
हरघड़ीहमसेकियाअदाहैये
नाशेंउठतीहैंआजयारोंकी
आनबैठोतोख़ुशनुमाहैये
देखबे-दममुझेलगाकहने
हैतोमुर्दासापरबलाहैये
मैंतोचुपहूँवोहोंटचाटेहै
क्याकहूँरीझनेकीजाहैये
हैरेबेगानगीकभूउनने
कहायेकिआश्नाहैये
तेग़परहाथदम-ब-दमकबतक
इकलगाचककिमुद्दआ'हैये
'मीर'कोक्यूँँमुग़्तनिमजाने
अगलेलोगोंमेंइकरहाहैये
  - Meer Taqi Meer
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