jin jin ko tha ye ishq ka aazaar mar ga.e | जिन जिन को था ये इश्क़ का आज़ार मर गए

  - Meer Taqi Meer
जिनजिनकोथायेइश्क़काआज़ारमरगए
अक्सरहमारेसाथकेबीमारमरगए
होतानहींहैउसलब-ए-नौ-ख़तपेकोईसब्ज़
ईसाख़िज़्रक्यासभीयक-बारमरगए
यूँँकानों-कानगुलनेजानाचमनमेंआह
सरकोपटककेहमपस-ए-दीवारमरगए
सदकारवाँवफ़ाहैकोईपूछतानहीं
गोयामता-ए-दिलकेख़रीदारमरगए
मजनूँदश्तमेंहैफ़रहादकोहमें
थाजिनसेलुत्फ़-ए-ज़िंदगीवेयारमरगए
गरज़िंदगीयहीहैजोकरतेहैंहमअसीर
तोवेहीजीगएजोगिरफ़्तारमरगए
अफ़्सोसवेशहीदकिजोक़त्ल-गाहमें
लगतेहीउसकेहाथकीतलवारमरगए
तुझसेदो-चारहोनेकीहसरतकेमुब्तिला
जबजीहुएवबालतोनाचारमरगए
घबरा'मीर'इश्क़मेंउससहल-ए-ज़ीस्तपर
जबबसचलाकुछतोमिरेयारमरगए
  - Meer Taqi Meer
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