jis sar ko ghuroor aaj hai yaa taaj-wari ka | जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताज-वरी का

  - Meer Taqi Meer
जिससरकोग़ुरूरआजहैयाँताज-वरीका
कलउसपेयहींशोरहैफिरनौहागरीका
शर्मिंदातिरेरुख़सेहैरुख़्सारपरीका
चलतानहींकुछआगेतिरेकब्क-ए-दरीका
आफ़ाक़कीमंज़िलसेगयाकौनसलामत
अस्बाबलुटाराहमेंयाँहरसफ़रीका
ज़िंदाँमेंभीशोरिशगईअपनेजुनूँकी
अबसंगमुदावाहैइसआशुफ़्ता-सरीका
हरज़ख़्म-ए-जिगरदावर-ए-महशरसेहमारा
इंसाफ़-तलबहैतिरीबेदाद-गरीका
अपनीतोजहाँआँखलड़ीफिरवहींदेखो
आईनेकोलपकाहैपरेशाँ-नज़रीका
सदमौसम-ए-गुलहमकोतह-ए-बालहीगुज़रे
मक़्दूरदेखाकभूबे-बाल-ओ-परीका
इसरंगसेझमकेहैपलकपरकिकहेतू
टुकड़ाहैमिराअश्कअक़ीक़-ए-जिगरीका
कलसैरकियाहमनेसमुंदरकोभीजाकर
थादस्त-ए-निगरपंजा-ए-मिज़्गाँकीतरीका
लेसाँसभीआहिस्ताकिनाज़ुकहैबहुतकाम
आफ़ाक़कीइसकारगह-ए-शीशागरीका
टुक'मीर'-ए-जिगर-सोख़्ताकीजल्दख़बरले
क्यायारभरोसाहैचराग़-ए-सहरीका
  - Meer Taqi Meer
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