ai abr-e-tar tu aur kisi samt ko baras | ऐ अब्र-ए-तर तू और किसी सम्त को बरस

  - Meer Taqi Meer
अब्र-ए-तरतूऔरकिसीसम्तकोबरस
इसमुल्कमेंहमारीहैयेचश्म-ए-तरहीबस
हिरमाँतोदेखफूलबिखेरेथीकलसबा
इकबर्ग-ए-गुलगिराजहाँथामिराक़फ़स
मिज़्गाँभीबहगईंमिरेरोनेसेचश्मकी
सैलाबमौजमारेतोठहरेहैकोईख़स
मजनूँकादिलहूँमहमिल-ए-लैलासेहूँजुदा
तन्हाफिरूँहूँदश्तमेंजूँनाला-ए-जरस
गिर्याउसकेदिलमेंअसरख़ूबहीकिया
रोताहूँजबमैंसामनेउसकेतूदेहैहँस
उसकीज़बाँकेओहदेसेक्यूँँकरनिकलसकूँ
कहताहूँएकमैंतोसुनाताहैमुझकोदस
हैराँहूँ'मीर'नज़्अ'मेंअबक्याकरूँँभला
अहवाल-ए-दिलबहुतहैमुझेफ़ुर्सतइकनफ़स
  - Meer Taqi Meer
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