jab se khat hai siyaah-khaal ki thaang | जब से ख़त है सियाह-ख़ाल की थांग

  - Meer Taqi Meer
जबसेख़तहैसियाह-ख़ालकीथांग
तबसेलुटतीहैहिन्दचारोंदाँग
बातअमलकीचलीहीजातीहै
हैमगरऔज-बिन-उनुक़कीटाँग
बनजोकुछबनसकेजवानीमें
राततोथोड़ीहैबहुतहैसाँग
इश्क़काशोरकोईछुपताहै
नाला-ए-अंदलीबहैगुल-बाँग
उसज़क़नमेंभीसब्ज़ीहैख़तकी
देखोजीधरकुएँपड़ीहैभाँग
किसतरहउनसेकोईगर्ममिले
सीम-तनपिघलेजातेहैंजोंराँग
चलीजातीहैहसबक़द्र-ए-बुलंद
दूरतकउसपहाड़कीहैडाँग
तफ़राबातिलथातूरपरअपने
वर्नाजातेयेदौड़हमभीफलाँग
मैंनेक्याउसग़ज़लकोसहलकिया
क़ाफ़िएहीथेउसकेऊट-पटाँग
'मीर'बंदोंसेकामकबनिकला
माँगनाहैजोकुछख़ुदासमाँग
  - Meer Taqi Meer
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