qaraar dil ka ye kahe ko dhang tha aage | क़रार दिल का ये काहे को ढंग था आगे

  - Meer Taqi Meer
क़रारदिलकायेकाहेकोढंगथाआगे
हमारेचेहरेकेऊपरभीरंगथाआगे
उठाएँतेरेलिएबद-ज़बानियाँउनकी
जिन्होंकीहमकोख़ुशामदसेनंगथाआगे
हमारीआहोंसेसीनेपेहोगयाबाज़ार
हरएकज़ख़्मकाकूचाजोतंगथाआगे
रहाथाशम्अ'सेमज्लिसमेंदोषकितनाफ़र्क़
किजलबुझेथेयेहमपरपतंगथाआगे
कियाख़राबतग़ाफ़ुलनेउसकेवर्ना'मीर'
हरएकबातपेदुश्नाम-ओ-संगथाआगे
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy